रिले: बड़े लोड को सुरक्षित चलाना
8 मिनट
रिले एक स्विच है जिसे इलेक्ट्रोमैग्नेट चलाता है। बोर्ड का छोटा सिग्नल एक अलग कॉन्टैक्ट को बंद करता है, इसलिए लो-वोल्टेज सर्किट बिना छुए दूसरे सर्किट को चला सकता है।
तीन कॉन्टैक्ट
- COM कॉमन टर्मिनल है।
- NO यानी नॉर्मली ओपन। रिले चालू होने पर यह COM से जुड़ता है।
- NC यानी नॉर्मली क्लोज़्ड। रिले बंद होने पर यह COM से जुड़ा रहता है।
ज़्यादातर प्रोजेक्ट COM और NO इस्तेमाल करते हैं, ताकि बिजली जाने पर लोड बंद रहे।
रिले मॉड्यूल की वायरिंग
- मॉड्यूल का VCC 5 V सप्लाई से जोड़ें।
- मॉड्यूल का GND कॉमन ग्राउंड से जोड़ें।
- मॉड्यूल का IN बोर्ड के आउटपुट पिन से जोड़ें।
- लोड का पॉज़िटिव तार काटें और दोनों सिरे COM और NO से जोड़ें।
कई मॉड्यूल एक्टिव-लो होते हैं, यानी पिन LOW होने पर रिले चालू होता है। पहले बिना लोड के जाँच करें।
रिले कैसे चुनें
रिले पर लिखी रेटिंग अधिकतम सीमा है। उससे काफ़ी नीचे रहें। मोटर और पंप स्टार्ट होते समय सामान्य से कई गुना करंट लेते हैं।
सुरक्षा: विद्यार्थी सिर्फ़ 12 V पंप या लैंप जैसे लो-वोल्टेज DC लोड ही स्विच करें। मेन्स की बिजली जानलेवा हो सकती है। मेन्स का कोई भी कनेक्शन योग्य इलेक्ट्रीशियन ही बिजली बंद करके करे, जाँचे और बंद बॉक्स में रखे।
रिले या MOSFET?
मोटर की स्पीड कंट्रोल जैसे तेज़ DC स्विचिंग के लिए MOSFET लें। लोड को पूरी तरह अलग रखना हो तो रिले लें। रिले क्लिक करते हैं और घिसते हैं, इसलिए तेज़ PWM के साथ कभी इस्तेमाल न करें।
छोटा क्विज़
1. बिजली न होने पर COM किससे जुड़ा रहता है?
2. मेन्स का कनेक्शन कौन करे?
3. मोटर की तेज़ स्पीड कंट्रोल के लिए क्या बेहतर है?